ऐसा कहा जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी से प्रधानमंत्री पद के सबसे प्रबल उम्मीदबार नरेंद्र मोदी की लेहर पूरे देश में है लेकिन अगर ऐसा है तो क्या खुद भारतीय जनता पार्टी में इस लेहर का असर दिखाई दे रहा है और अगर पार्टी के बाहर की बात करें तो गूगल हो या मीडिया हर तरफ मोदी ही छाये हुए है यही नही वो जहां भी जाते है उन्हें देखने और सुनने के लिये जनसैलाव उमर पड़ता है।
दूसरी तरफ बचे खुचे बड़े नेता जिनमें राजनाथ सिंह और अरुण जेटली शामिल है जो कि नरेंद्र मोदी का हाथ थाम चुके है। वो हर कदम पर मोदी के साथ है। लेकिन आडवाणी ने इस लेहर को रोकने की हर मुमकिन चाल चली लेकिन मोदी के सामने उनकी एक न चली और उन्हे खामोश ही रहना पड़ा।
पार्टी के अंदर युवा नेताओं और आम कार्यकर्ताओं की बात करें तो वह केवल मोदी का ही नाम ले रहे है उनके अंदर जो एक नया जोश दिखाई दे रहा है वो शायद मोदी की लेहर का असर है ऐसा लगता है जैसे मोदी ने पार्टी की शाखाओ को एक नया जीवनदान दिया है। अगर मोदी के नेतृत्व में पार्टी के कर्ताधर्ता पार्टी में नई जान फूकना चाहते है तो शायद पूराने नेताओं को किनारे करना गलत नही माना जाएगा।
भाजपा पूरे दस साल से सत्ता से बाहर रही जिसके दौरान वे दो आम चुनाव हार चुके है अगर आम चुनाव जीतना है तो पार्टी को नए सिरे से संभारने की जरुरत है जैसा कि मोदी करने में लगे हुए है।

