शोले का मशहूर डायलॉग था जब रात को बच्चा रोता है तो माँ कहती है सो जा बेटा नहीं तो गब्बर आ जाएगा। कुछ ऐसा ही जुमला नरेंद्र मोदी के बारे में अन्य राजनैतिक दलों के बीच इन दिनों चल रहा है।कांग्रेस हो, बसपा हो,या सपा हो सभी पार्टियों के सुप्रीमों अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को यही सलाह दे रहे है कि अगर लोकसभा चुनवों में कोई भी लापरबाही हुई तो सत्ता में मोदी आ जाएगा। ऐसा लगता है कि लड़ाई भातीय जनता पार्टी से नही मोदी से है।
सियासत की बदली हुई तस्वीर में महामुकाबले की यही तस्वीर सबको नज़र आ रही है। सोनिया, राहुल, मुलायम, माया, नीतीश इन सभी के केवल दल बदले है लेकिन सियासी निशाना सिर्फ है वो है नरेंद्र मोदी शायद इस बात को नरेंद्र मोदी भी जान गये है इसलिये मोदी ने अपनी रैलियों में अब नया ऐलान शुरु कर दिया है कि कमल को दिया गया हर वोट मोदी का वोट होगा 2014 की चुनावी बिसात के केंद्र में नरेंद्र मोदी हों तो हमले तो चौतरफा होंगे ही।
दूसरों को नैतिकता का पाठ पढाने वाले अरविंद केजरीवाल को दागी नेता मुख्तार अंसारी के समर्थन से भी गुरेज नही है केजरीवाल ने कहा है कि वाराणसी में मोदी को हराने के लिए सबको मिलकर जोर लगाना होगा उनके इन इशारो से साफ लगता है कि यह भी कहीं न कहीं मोदी के लहर का असर है। समाजबादी पार्टी के नेता जी मुलायम सिंह यादव भी वाराणसी से 80 किलोमीटर दूर आजमगढ़ से चुनाव लड़ रहे है जिससे मोदी के प्रभाव को कम कर सके। इससे साफ जाहिर होता है कि मोदी का डर तो नेता जी को भी है। माया हो या कांग्रेस सभी पार्टियां गोधरा कांड जैसे मुददों पर मोदी को घेरने में लगी हुई है। लेकिन विरोधियों के एकसुर से किए हमलो में मोदी का सिर्फ इतना कहना है कि उनको दिया गया हर वोट किसी के खिलाफ न ही वल्कि देश के विकास के लिए दिया गया वोट है और मोदी के प्रति जनता की लोकप्रियता दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है।
सियासी मौसम का सबसे दिलचस्प मोड़ आ चुका है और तस्वीर है मोदी बनाम ऑल की जब भी ऐसा हुआ है। एक करिश्माई राजनैतिक परिवर्तन से देश गुजरा है। शायद विरोधी इस बात को समझ गये है और ये देखना होगा कि जनता इस दिलचस्प लड़ाई में किसके एजेंडे को वाजिब मानती है।

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